मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

भोजपुरी शायरी

1. एगो जुग से ही चहले बानी तोहरा के,बड़ा ही मुश्किल से पवले बानी तोहरा के,
कइसे बिसरीं हम तोहरा के,
काहे से की जब चोरवले बानी ठेठ बिहारी
किस्मत के चिचरीयन से तोहरा के।।
2.का हम कहीं तहरा बारे में,
कि नईखे अल्फ़ाज़ हमरा पिटारा में।
अरे कइसे बुझांई ठेठ बिहारी एह मनवा के
कि, जब तईयारे नईखे इ समझे के,
कि, बडाई त ओकर कइल जाला
जे एकरा काबि़ल होला,
अब ओकर का बडाई कईल जाओ
जे खुदे बडाई के होखो।।
3. लिखीले रात भर हम शायरी तोहरा इस्तकबाल में,
बना देले बा ज़माना हमरो के उस्ताद-ए- कउव्वाल महफ़िल में
कि मज़ा ले ले के सुनता दुनिया हमरा मोहब्बत के तराना के
बतावस ठेठ बिहारी अपना शायरी से दुनिया के सारी, की
कईले बाड़न ई केकरा से ईयारी..........।।
4.बीतल माघ आई गइले फागुन बौरहवा,
बाकीर अइली नाहीं पिया के प्यारी नइहर से ससुरवा,
कि तडपस मनवा में सजनवा की
बिती रे जंईहे इहो फगुनवा बे-रंगवा
की कब होई ठेठ बिहारी से  मिलनवा हो राम।।

फेर मुलाकात होइ अइसने कुछ आउरो शायरी के संगे तब तकले प्रणाम।।।।।।।।।।

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